हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक विशेष जांच आयोग ने गाजा और वेस्ट बैंक (पूर्वी यरुशलम सहित) में फ़िलिस्तीनी बच्चों की स्थिति पर एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट पेश की है। भारत के सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और पूर्व चीफ जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर की अध्यक्षता वाले इस आयोग ने अपनी 100 पन्नों की रिपोर्ट में बताया है कि इज़रायली सुरक्षा बलों ने जानबूझकर फ़िलिस्तीनी बच्चों को अपना निशाना बनाया है और उनका बचपन पूरी तरह तबाह कर दिया है।
इस लेख में हम इसी रिपोर्ट के मुख्य और बेहद गंभीर पहलुओं को आसान भाषा में समझेंगे।
दिल दहला देने वाले आंकड़े
अक्टूबर 2023 से लेकर मार्च 2026 तक की अवधि की जांच करने पर आयोग ने पाया कि 7 अक्टूबर 2023 से अब तक 20,000 से अधिक फ़िलिस्तीनी बच्चे मारे जा चुके हैं और 44,000 से ज्यादा बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
इस दौरान हुई कुल मौतों में करीब 30% केवल बच्चे हैं। यह संयुक्त राष्ट्र की पहली ऐसी विशेष जांच रिपोर्ट है जो मुख्य रूप से फ़िलिस्तीनी बच्चों के खिलाफ हुए अपराधों पर केंद्रित है।
हमले का तरीका: ड्रोन और स्नाइपर का इस्तेमाल
आयोग को इन हत्याओं के पक्के और अकाट्य सबूत मिले हैं। बच्चों की जान मुख्य रूप से अत्यधिक विस्फोटक वाले हवाई हमलों से गई।
इसके अलावा, क्वाडकॉप्टर ड्रोन और स्नाइपर राइफल्स का इस्तेमाल करके भी बच्चों को निशाना बनाया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन हथियारों का निशाना बच्चों के सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से थे, जो एक व्यापक और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा मालूम होता है।
अनाथ संकट और तबाह होता भविष्य
इस युद्ध ने बच्चों से सिर्फ उनकी जान नहीं ली, बल्कि उनके सिर से माता-पिता का साया भी छीन लिया। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच लगभग 58,054 बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक या दोनों को खो दिया, जिसने गाजा में एक भयंकर 'अनाथ संकट' को जन्म दिया है।
इसके साथ ही, इज़रायल ने जानबूझकर फ़िलिस्तीन की शिक्षा प्रणाली को नष्ट किया है।
गाजा के 97% स्कूल तबाह या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, और 95% विश्वविद्यालयों पर असर पड़ा है (जिनमें से 38 में से 22 विश्वविद्यालय पूरी तरह मिट्टी में मिला दिए गए हैं)।
आयोग ने इसे फ़िलिस्तीनी समाज की "बौद्धिक और सामाजिक नींव को नष्ट करना" करार दिया है।
भुखमरी और स्वास्थ्य आपातकाल
गाजा में बच्चों के जीने की परिस्थितियां खत्म की जा रही हैं। 1 अक्टूबर 2025 तक, 151 बच्चों की मौत कुपोषण (भुखमरी) के कारण दर्ज की गई है।
इसके अलावा, केवल अक्टूबर से दिसंबर 2023 के बीच ही 1,000 से अधिक बच्चों के हाथ या पैर काटने (amputation) पड़े।
युद्धविराम के दावों को खारिज करते हुए डॉ. मुरलीधर ने बताया कि अक्टूबर 2025 के युद्धविराम के बाद भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया; लोगों की हत्याएं जारी रहीं और मानवीय सहायता की भारी कमी बनी रही।
हमलों के पीछे का असली मकसद और युद्ध अपराध
आयोग ने साफ तौर पर कहा है कि इज़रायली अधिकारी और सुरक्षा बल गाजा और वेस्ट बैंक में युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराध (जैसे उत्पीड़न) के लिए जिम्मेदार हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह सब 'नरसंहार' (genocide) के दावों को पुख्ता करता है।
बच्चों को निशाना बनाने का मुख्य उद्देश्य फ़िलिस्तीनियों की आबादी (demographic vitality) को कमजोर करना है, ताकि उनका समाज भविष्य में अपने 'आत्म-निर्णय' (self-determination) के अधिकार का इस्तेमाल न कर सके।
वहीं, वेस्ट बैंक के बारे में रिपोर्ट कहती है कि वहां इज़रायली बस्तीवासी (settlers) जो हिंसा कर रहे हैं, वह कोई आम अपराध नहीं बल्कि गैरकानूनी तरीके से ज़मीन कब्जाने की एक साझा राजकीय नीति का हिस्सा है।
हमास पर भी उठे गंभीर सवाल
इस रिपोर्ट में केवल इज़रायल की कार्यप्रणाली की आलोचना नहीं की गई है। आयोग ने अपनी 15 जून 2026 की रिपोर्ट के निष्कर्षों को दोहराते हुए कहा कि हमास ने भी गाजा में कानून और व्यवस्था के चरमराने का फायदा उठाते हुए फ़िलिस्तीनियों के खिलाफ गंभीर अपराध किए हैं, जिनमें उत्पीड़न, यातना और गैरकानूनी हत्याएं शामिल हैं।
आगे का रास्ता क्या है?
आयोग ने फ़्लोटिला कार्यकर्ताओं के साथ हुए दुर्व्यवहार, और फ़िलिस्तीनी कैदियों के यौन शोषण व यातनाओं की भी कड़ी निंदा की है। आयोग के अध्यक्ष ने कुछ देशों में इस मामले पर शुरू हुई न्यायिक जांचों का स्वागत किया है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की है कि वे इस रिपोर्ट की सिफारिशों पर जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई करें। उनका मुख्य लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के लिए देशों और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करना है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों पर रोक लग सके।
Israeli forces have killed over 20,000 children & injured 44,000 more since 7 Oct. 2023, Srinivasan Muralidhar, chair of the @UN Commission of Inquiry on the Occupied Palestinian Territory & Israel, told reporters today. #HRC62
— UN Human Rights Council Investigative Bodies (@uninvhrc) June 23, 2026
More on their new report ➡️ https://t.co/gK2KhtlgFb pic.twitter.com/ZQGUQkJKxD

0 Comments